रूठ गए मेरे मेघ ,शायद मेघ क्रिकेट खिलाडी की तरह हे जैसे क्रिकेट खिलाडी कोई मैच में अच्छा खेलता हे तो सभी ओसकी तारीफ़ करते हे और दुसरे मैच में वह खिलाडी बहुत ख़राब खेलता हे , वैसे ही मेघो की जरा सी तारीफ क्या की की मेघ तो न जाने कहा चले गए कहा बरस रहे हे, इसकी कोई खबर हे , बेचारे किसानो ने अच्छी फसल के आने की उम्मीद में बिज बो दिया , जो सब बेकार गया , नई- नई बीमारिया पनप रही हे l हम मेघो से फिर से प्रार्थ्रना करते हे मेघ फिर से जल्दी बरसे ,,अगर मेघ जल्दी नहीं बरसे तो पहले से महगाई के मारे पिस रहा आम आदमी के लिए पहाड़ टूट जायेंगा क्योंकि खाने पिने और रोजमर्रा के उपयोग में आने वाली वस्तुओ के दामो में भारी वृद्धि होने के पुरे पुरे आसार दिखाई दे रहे हे, गुजरात, महाराष्ट्र, आँध्रप्रदेश ,कर्नाटक ,मध्यप्रदेश , तमिलनाडु, केरला, में विशेष कर खाने पिने की वस्तुए पैदा होती हे ,और इन्ही प्रदेशो में मेघ रूठे हुए हे ,किसानो और अन्य सामाजिक संगठनो से अनुरोध हे कीपुराणी मान्यताओ के अनुसार मेघो को मानाने के लिए भगवन शिव की आरधना में महारुद्र या लघुरुद्र यज्ञ करवाए जिससे सभी लोगो का भला हो सके , हाँ इसमें गौर करने वाली इक बात आज समाचरपत्रो में पड़ने को मिली बड़ा आश्चर्य हुआ की हिंदुस्तान के कृषि मंत्री आदरनीय शरद पावर ने खा की कहाँ हे महंगाई ,,, पवार साहेब जरा क्रिकेट जगत से अलग हट कर अपने ही पार्टी कर्यकर्ता के गाँव में जाकर किसी झोपडी में रात गुजार कर देखी फिर मालूम होंगा उस आम कार्यकर्ता के घर वालो के दर्द का एहसास , शक्कर एक्सपोर्ट, प्याज एक्सपोर्ट , शक्कर ३४.रूपये किलो ,खाने का तेल ८० रूपये किलो, दाल ५०.रूपये किलो, गेहू २५ रूपये किलो, माचिस २रुप्ये नग ,केरोसिन ४०रुप्ये लीटर ,दूध ३५ रूपये लीटर ,चावल ३५ रूपये किलो. साबुन १५रुप्ये नग खोपरा तेल ९०रुप्ये किलो ,कोयला ३० रूपये किलो ,पानी दूषित , अगर अच्छा पानी लेना हे तो १५ रूपये की बोतल , चना ४० रूपये किलो, सब्जियो के भाव घर या अपने गुमास्ता से पूछो, फिर मालूम पड़ेंगा की महंगाई कहा हे,क्रपया अपनी जिम्मेदारी से भागे नहीं, ty चन्दन गोस्वामी
MEGH MALHAR
रविवार, 3 जुलाई 2011
रूठ गए मेरे मेघ
रूठ गए मेरे मेघ ,शायद मेघ क्रिकेट खिलाडी की तरह हे जैसे क्रिकेट खिलाडी कोई मैच में अच्छा खेलता हे तो सभी ओसकी तारीफ़ करते हे और दुसरे मैच में वह खिलाडी बहुत ख़राब खेलता हे , वैसे ही मेघो की जरा सी तारीफ क्या की की मेघ तो न जाने कहा चले गए कहा बरस रहे हे, इसकी कोई खबर हे , बेचारे किसानो ने अच्छी फसल के आने की उम्मीद में बिज बो दिया , जो सब बेकार गया , नई- नई बीमारिया पनप रही हे l हम मेघो से फिर से प्रार्थ्रना करते हे मेघ फिर से जल्दी बरसे ,,अगर मेघ जल्दी नहीं बरसे तो पहले से महगाई के मारे पिस रहा आम आदमी के लिए पहाड़ टूट जायेंगा क्योंकि खाने पिने और रोजमर्रा के उपयोग में आने वाली वस्तुओ के दामो में भारी वृद्धि होने के पुरे पुरे आसार दिखाई दे रहे हे, गुजरात, महाराष्ट्र, आँध्रप्रदेश ,कर्नाटक ,मध्यप्रदेश , तमिलनाडु, केरला, में विशेष कर खाने पिने की वस्तुए पैदा होती हे ,और इन्ही प्रदेशो में मेघ रूठे हुए हे ,किसानो और अन्य सामाजिक संगठनो से अनुरोध हे कीपुराणी मान्यताओ के अनुसार मेघो को मानाने के लिए भगवन शिव की आरधना में महारुद्र या लघुरुद्र यज्ञ करवाए जिससे सभी लोगो का भला हो सके , हाँ इसमें गौर करने वाली इक बात आज समाचरपत्रो में पड़ने को मिली बड़ा आश्चर्य हुआ की हिंदुस्तान के कृषि मंत्री आदरनीय शरद पावर ने खा की कहाँ हे महंगाई ,,, पवार साहेब जरा क्रिकेट जगत से अलग हट कर अपने ही पार्टी कर्यकर्ता के गाँव में जाकर किसी झोपडी में रात गुजार कर देखी फिर मालूम होंगा उस आम कार्यकर्ता के घर वालो के दर्द का एहसास , शक्कर एक्सपोर्ट, प्याज एक्सपोर्ट , शक्कर ३४.रूपये किलो ,खाने का तेल ८० रूपये किलो, दाल ५०.रूपये किलो, गेहू २५ रूपये किलो, माचिस २रुप्ये नग ,केरोसिन ४०रुप्ये लीटर ,दूध ३५ रूपये लीटर ,चावल ३५ रूपये किलो. साबुन १५रुप्ये नग खोपरा तेल ९०रुप्ये किलो ,कोयला ३० रूपये किलो ,पानी दूषित , अगर अच्छा पानी लेना हे तो १५ रूपये की बोतल , चना ४० रूपये किलो, सब्जियो के भाव घर या अपने गुमास्ता से पूछो, फिर मालूम पड़ेंगा की महंगाई कहा हे,क्रपया अपनी जिम्मेदारी से भागे नहीं, ty चन्दन गोस्वामी
गुरुवार, 23 जून 2011
मेघ मल्हार
पिछले मई माह की बात हे झुलसती हुई गर्मी और उपर से आखरी सप्ताह में नौतपे की शुरुवात एसा लग रहा था मानो सूर्यदेव ने आग उगलने में धरती से कोई कोताही नही बरतने का ठान लिया हो l इंसानों तो शामत ही आ गई पुरे शहर में गर्मी के प्रकोप से नौतपा कर्फ्यू सा लगा हुआ था l सभी लोग अपने अपने घरो ऑफिस में पंखे ,कूलर ,ए.सी .में दुबक कर बैठ गये व मन ही मन इंद्र देवता से अपने मेघो को जल्द से जल्द भेजकर उन्हें राहत प्रदान करने की प्रार्थना करने लगे l नौतापा खतम होते हे मेघो ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया मानो इंद्र देव ने हमारी प्रार्थना काबुल कर अपने मेघो को भेज दिया और पूरा आसमान काली छठा से भर जाता हे लगता हे मानो अब बरसेंगे मेघ और गरम हवाओ से झुलसती चमड़ी को अपने पानी से ठंडा कर राहत प्रदान करंगे l लेकिन मेघ अपनी मस्ती में आते और धरती को मामूली सा गिला कर धरती से भीनी -भीनी सौंधी सी खुशबू निकालकर फिर से आने का इशारा दे जाते l लेकिन यहाँ पर तो उसका उल्टा परिणाम देखा जा रहा था धरती ने छाती से अपने शरीर की गर्मी को निकालना शुरू कर दिया उमस ही उमस से इन्सान परेशान हो जाता और कालिदास को याद कर मेघो से बरसने का आग्रह ,चारो और से करने लगता हे l लेकिन मेघ तो मेघ हे घुमड़ घुमड़ कर उमड़ने लगते और मोर के समान अपना नाच दिखा कर इधर उधर भागते और मल्हार करने लगते उनकी भागने और मल्हार की गति ऐसी लगती मानो भगवान विष्णु का वाहन अपनी वेग गति से जा रहा हो इतना सुंदर नजारा आसमान में देख कर हल्की सी मुस्कराहट के साथ मेघो के बरसने की प्रार्थना फिर से करते और बरसते ही मानसून की पहली फुहार अपने मासूम से हसीन चेहरे पर छुआ कर उनका स्वागत करते लेकिन पहली फुहार के छुते ही शरीर के हर अंग में एक अलग सी तरंग सिहरन छा जाती मानो इन्द्रलोक से कोई अप्सरा छु कर चली गई , एक अलग सा सकून हमे मेघो ने तोहफे में दिया हो तभी यात्रा करते हुए रेल गाड़ी की ए.सी की बंद खिड़की के शीशे से निहारते हुए मेघो का खेतो पर बरसना ,सुखी हो चुकी प्यासी धरती की प्यास बुझाना ,सैकड़ो वर्षो से खड़े वृक्षों पर बरसना ,तालाबो ,नालो ,नदियो में गिरती हुई बरसात की बूंदों को निहारना और बहार के बतावरन का आभास आखों के साथ कानो से होते हुए शरीर को अहसास होना अपने आप में अदभूत हे l और कोई फ़िल्मी गीत को याद करते हुए मेघो को धन्यवाद देते हुए मुझे गुनगुनाने का मन हो रहा था की "मौसम आया रे मेरे दिल को छाया रे ", २)" मेघा रे मेघा रे--तू आ रे-- आज तू प्रेम का सन्देश ला रे " और ख़ुशी हो रही थी की अबकी बार मेघ इतना बरसेंगे की मेरे देश के किसान फसल से लबालब जायेंगे और कोई किसान आत्महत्या नहीं करेंगा, लेकिन मन में डर भी हे कही मानसून के मेघो पर BHRSTCHAREIO की कु दृस्ठी न पड जाये फिर न जाने क्या होंगा मेरे जैसे आम इन्सान का -------लेकिन फिर भी आया रे मौसम आया रे l मस्ती में झूमो गाओ /हमें तो झुलसती गर्मी से राहत दी इन मेघो ने अपने मल्हार से ,l मेघ मल्हार
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