पिछले मई माह की बात हे झुलसती हुई गर्मी और उपर से आखरी सप्ताह में नौतपे की शुरुवात एसा लग रहा था मानो सूर्यदेव ने आग उगलने में धरती से कोई कोताही नही बरतने का ठान लिया हो l इंसानों तो शामत ही आ गई पुरे शहर में गर्मी के प्रकोप से नौतपा कर्फ्यू सा लगा हुआ था l सभी लोग अपने अपने घरो ऑफिस में पंखे ,कूलर ,ए.सी .में दुबक कर बैठ गये व मन ही मन इंद्र देवता से अपने मेघो को जल्द से जल्द भेजकर उन्हें राहत प्रदान करने की प्रार्थना करने लगे l नौतापा खतम होते हे मेघो ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया मानो इंद्र देव ने हमारी प्रार्थना काबुल कर अपने मेघो को भेज दिया और पूरा आसमान काली छठा से भर जाता हे लगता हे मानो अब बरसेंगे मेघ और गरम हवाओ से झुलसती चमड़ी को अपने पानी से ठंडा कर राहत प्रदान करंगे l लेकिन मेघ अपनी मस्ती में आते और धरती को मामूली सा गिला कर धरती से भीनी -भीनी सौंधी सी खुशबू निकालकर फिर से आने का इशारा दे जाते l लेकिन यहाँ पर तो उसका उल्टा परिणाम देखा जा रहा था धरती ने छाती से अपने शरीर की गर्मी को निकालना शुरू कर दिया उमस ही उमस से इन्सान परेशान हो जाता और कालिदास को याद कर मेघो से बरसने का आग्रह ,चारो और से करने लगता हे l लेकिन मेघ तो मेघ हे घुमड़ घुमड़ कर उमड़ने लगते और मोर के समान अपना नाच दिखा कर इधर उधर भागते और मल्हार करने लगते उनकी भागने और मल्हार की गति ऐसी लगती मानो भगवान विष्णु का वाहन अपनी वेग गति से जा रहा हो इतना सुंदर नजारा आसमान में देख कर हल्की सी मुस्कराहट के साथ मेघो के बरसने की प्रार्थना फिर से करते और बरसते ही मानसून की पहली फुहार अपने मासूम से हसीन चेहरे पर छुआ कर उनका स्वागत करते लेकिन पहली फुहार के छुते ही शरीर के हर अंग में एक अलग सी तरंग सिहरन छा जाती मानो इन्द्रलोक से कोई अप्सरा छु कर चली गई , एक अलग सा सकून हमे मेघो ने तोहफे में दिया हो तभी यात्रा करते हुए रेल गाड़ी की ए.सी की बंद खिड़की के शीशे से निहारते हुए मेघो का खेतो पर बरसना ,सुखी हो चुकी प्यासी धरती की प्यास बुझाना ,सैकड़ो वर्षो से खड़े वृक्षों पर बरसना ,तालाबो ,नालो ,नदियो में गिरती हुई बरसात की बूंदों को निहारना और बहार के बतावरन का आभास आखों के साथ कानो से होते हुए शरीर को अहसास होना अपने आप में अदभूत हे l और कोई फ़िल्मी गीत को याद करते हुए मेघो को धन्यवाद देते हुए मुझे गुनगुनाने का मन हो रहा था की "मौसम आया रे मेरे दिल को छाया रे ", २)" मेघा रे मेघा रे--तू आ रे-- आज तू प्रेम का सन्देश ला रे " और ख़ुशी हो रही थी की अबकी बार मेघ इतना बरसेंगे की मेरे देश के किसान फसल से लबालब जायेंगे और कोई किसान आत्महत्या नहीं करेंगा, लेकिन मन में डर भी हे कही मानसून के मेघो पर BHRSTCHAREIO की कु दृस्ठी न पड जाये फिर न जाने क्या होंगा मेरे जैसे आम इन्सान का -------लेकिन फिर भी आया रे मौसम आया रे l मस्ती में झूमो गाओ /हमें तो झुलसती गर्मी से राहत दी इन मेघो ने अपने मल्हार से ,l मेघ मल्हार